Saturday, August 13, 2016

सिलसिलेवार


                                          जवान खून का इस तरह सूखता जाना

रूमानी होकर किसी से चैट कर रहा था तभी रिम्मी ने मैसेंजर पर पिंग किया। वह किसी अभिषेक भगत की अचानक मौत से स्तब्ध सी लग रही थी। जैसे उसने लिखा कि भगत आईआईएमसी में उसका जूनियर है तुरंत मेरा दिमाग रमेश भगत पर गया जो आईआईएमसी में मेरे बैच का था। हालांकि जब उसने 14-15 लिखा तो थोड़ी राहत मिली लेकिन अगले ही पल अभिषेक भगत को लेकर मन बेचैन हो गया।

निरूपमा पाठक, अंशु सचदेवा, अंकित शर्मा,  सागर मिश्रा और सुमेघा गुलाटी के बाद अब एक और गर्म खून का गुम होना मन को कुरेदता जा रहा था। 

फेसबुक देखकर मालूम हुआ अभिषेक ने कल ही अपनी मां का जन्मदिन मनाया था और उसकी तस्वीरों पर बहुत सारे लाइक्स थे। उसके फ्रैंडलिस्ट में आईआईएमसी के कई छात्र थे जिनमें केशव जी भी थे। अभिषेक की मौत आखिर हुई कैसे जानने के लिए बेचैन हुआ जा रहा था, सो झट से केशव जी को फोन लगा दिया। बेचारे नाइट शिफ्ट करके सोए थे, फिर भी फोन ले लिया उन्होंने। मालूम चला अभिषेक को कैंसर था और उसने किसी को बताने से मना किया था। उसके बहुत नजदीकी दोस्तों को ही इसकी जानकारी थी।







No comments:

Post a Comment